लोकप्रिय प्रविष्टियां

आजकल भाव सब सूख से गए हैं आँखों से पानी भी गिरता नहीं परछाई भी जैसे जुदा जुदा सी है मन भी अब पाखी बन उड़ता नहीं पंख भी जैसे क़तर गए हैं. पर फिर भी ये दिल धडकता है ज्यादा इत्मीनान से. ख़ुशी भी झलकती है अपने पूरे गुमान से हाँ पर ख़्वाबों को मेरे ज़ंग लग गई है…

जिन्दगी कब किस मोड़ से गुजरेगी ,या किस राह पर छोड़ेगी काश देख पाते हम. जिन्दगी को बहुत सी उपमाएं दी जाती हैं मसलन – जिन्दगी एक जुआ है , जिन्दगी एक सफ़र है , जिन्दगी भूलभुलैया है आदि  आदि .पर पिछले दिनों एक मेट्रो में सफ़र करते हुए सामने की सीट पर कुछ अलग -अलग रूप  में नजर आई…

भाषा – मेरे लिए एक माध्यम है अभिव्यक्ति का. अपनी बात सही भाव में अधिक से अधिक दूसरे  तक पहुंचाने का. अत: मैं यह मानती हूँ कि जितनी भी भाषाओं का ज्ञान हो वह गर्व की बात है परन्तु तब तक, जब तक किसी भाषा को हीन बना कर वह गर्व न किया जाये।  यूँ जरुरत के वक़्त भाषा को किसी…

यूँ ही कभी कभी ठन्डे पड़ जाते हैं मेरे हाथ. तितलियाँ सी यूँ ही मडराने लगती हैं पेट में. ऊंगलियाँ करने लगती हैं अठखेलियाँ यूँ ही एक दूसरे से . पलकें स्वत: ही हो जाती हैं बंद. और वहाँ बिना किसी जुगत के ही कुछ बूंदे निकल आती हैं धीरे से. काश कि तेरे पोर उठा लें और  कह दें उन्हें मोती. या…

सभी साहित्यकारों से माफी नामे सहित . कृपया निम्न रचना को निर्मल हास्य के तौर पर लें. आजकल मंदी का दौर है उस पर गृहस्थी का बोझ है  इस काबिल तो रहे नहीं कि  अच्छी नौकरी पा पायें  तो हमने सोचा चलो  साहित्यकार ही बन जाएँ  रोज कुछ शब्द  यहाँ के वहां लगायेंगे और नए रंगरूटों को  फलसफा ए लेखन सिखायेंगे कुछ नए…

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