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मैं तेरी परछाई हूँ

मैं तेरी परछाई हूँ

माँ!आज़ ज्यों ही मैं तेरे गर्भ की गर्माहट में निश्चिंत हो सोने लगी मेने सुना तू जो पापा से कह रही थी। और मेरी मूंदी…'

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उलझे धागे

उलझे धागे

धागे जिंदगी के कभी कभी उलझ जाते हैं इस तरह की चाह कर फिर उन्हें सुलझा नही पाते हैं हम. कोशिश खोलने की गाँठे जितनी…'

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काली अँधेरी रात

काली अँधेरी रात

काली अँधेरी रात से हो सकता है डर लगता हो तुमको मैं तो अब भी स्याह रात में तेरी याद का दिया जलाती हूँ।ये दिन तो गुजर जाता…'

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NRI

NRI

सुबह की चाय की प्याली और रफ़ी के बजते गीतों के साथ एक हुड़क आज़ भी दिल में हिलकोरे सी लेती है दिल करता है छोड़…'

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एक क़तरा आसमान

एक क़तरा आसमान

कुछ थे रंगबिरंगे सपने, कुछ मासूम से थे अरमान कुछ खवाबों ने ली अंगड़ाई कुछ थीं अनोखी सी दास्तान फिर चले जगाने इस संमाज को…'

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मेरा देश महान.

मेरा देश महान.

ये कैसा महान देश है मेरा.... कल के कर्णधार ही जहाँ भूखे नंगे फिरते हैं भावी सूत्रधार जहाँ ढाबे पर बर्तन घिसते हैं सृजन करने…'

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