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मेरी पनाह

मेरी पनाह

तू समझे न समझे दीवानगी मेरी, तेरे आगोश में मेरे मर्ज़ की दवा रक्खी है। दिल आजकल कुछ भारी- भारी लगता है, उसपर तेरी याद…'

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क्या हम आजाद हैं ?

क्या हम आजाद हैं ?

दुनिया का एक सर्वोच्च गणराज्य है उसके हम आजाद बाशिंदे हैं पर क्या वाकई हम आजाद हैं? रीति रिवाजों के नाम पर कुरीतियों को ढोते…'

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आजकल के हालात

आजकल के हालात

होली के सच्चे रंग नही अब यहाँ खून की है बोछर दीवाली पर फूल अनार नही अब मानव बम की गूँजे आवाज़ ईद पर गले…'

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मैं तेरी परछाई हूँ

मैं तेरी परछाई हूँ

माँ!आज़ ज्यों ही मैं तेरे गर्भ की गर्माहट में निश्चिंत हो सोने लगी मेने सुना तू जो पापा से कह रही थी। और मेरी मूंदी…'

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उलझे धागे

उलझे धागे

धागे जिंदगी के कभी कभी उलझ जाते हैं इस तरह की चाह कर फिर उन्हें सुलझा नही पाते हैं हम. कोशिश खोलने की गाँठे जितनी…'

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काली अँधेरी रात

काली अँधेरी रात

काली अँधेरी रात से हो सकता है डर लगता हो तुमको मैं तो अब भी स्याह रात में तेरी याद का दिया जलाती हूँ।ये दिन तो गुजर जाता…'

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